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शांति करुणा और प्रज्ञा के संदेश के साथ खंडवा में मनाई गई बुद्ध जयंती।

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शांति करुणा और प्रज्ञा के संदेश के साथ खंडवा में मनाई गई बुद्ध जयंती।

पंचशील नगर सिंगाड तलाई में दिन भर चला पूजा अर्चना का दौर रात्रि में हुआ भंडारा।

खंडवा। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी बुद्ध जयंती का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ नगर में मनाया गया। सिंगाड तलाई स्थित पंचशील नगर एवं सूरजकुंड रेलवे कॉलोनी में बुद्ध मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं पहुंचकर दर्शन पूजन कर नमन किया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि बुद्ध जयंती (या बुद्ध पूर्णिमा) बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) की त्रिविध याद में मनाया जाने वाला सबसे पवित्र त्योहार है। वैशाख पूर्णिमा को मनाई जाने वाली यह जयंती शांति, करुणा और प्रज्ञा के संदेश के साथ विश्वभर में, विशेषकर एशिया में हर्षोल्लास से मनाई जाती है। बुद्ध जयंती का मुख्य पावन संयोग यह अद्वितीय है क्योंकि बुद्ध का जन्म, ज्ञानोदय (बोधगया में) और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर में) तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध जयंती यह 1 मई को मनाई गई।
1999 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी, जो बौद्ध धर्म के मानवता में योगदान को स्वीकार करता है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पंच शील नगर सिंगाड़ तलाई बुध्द विहार में सभी वार्ड वासियों ने मंदिर में पहुंचकर दर्शन कर बुद्ध वंदना की। दिन भर मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना की गई पंचशील नगर में रात्रि में बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा दर्शन पूजन पश्चात भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ। क्षेत्र के जितेंद्र बौद्धड़े, कमल तायडे,सतीश इंगले, पन्ना लाल नीलकंठ, संजय मेढेकर, सोनू लहसे एवम् समस्त महिला मंडल एवं सदस्यों की उपस्थिति में
बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के तत्वाधान में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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